Bakra Eid Kyon Manate Hai: बकरा ईद क्यों मनाई जाती है

Bakra Eid Kyon Manate Hai: बकरा ईद क्यों मनाई जाती है

नमस्कार दोस्तों बकरा ईद को (ईद उल ज़ुहा ईद अल अज़हा) त्योहार भी बताया जाता है। दोस्तो इस त्योहार को ईद उल फ़ितर के क़रीब दो महीने और दस दिन बाद बकरा ईद के रूप में मनाया जाता है। हम आपको बता दें कि बकरा ईद के दिन लगभग लगभग घरों में साल भर से बड़े बकरे की बलि दी जाती है, यदि एक साल से छोटा बकरा है तो उसकी बलि नहीं चढ़ाते हैं। मुसलमान भाई के घर पर यदि बकरा नहीं है तो क़रीबन बकरा ईद के एक दो महीने पहले वह बकरा मंडी से जाकर बकरा ख़रीद कर लाते हैं।

उस बकरे की बकरा ईद के दिन बलि दी जाती है फिर उस बकरे के मीट को अपने परिवार रिश्तेदार और फ्रेंड के साथ बाँट दिया जाता है, और क़रीबन तीन दिन तक के लिए है बक़रीद का त्योहार मनाते रखते हैं।

Bakra Eid Kyu Manate Hai

बताया जाता है कि बकरा ईद मुसलमानों के पैगंबर और हज़रत मोहम्मद पूर्वज हज़रत इब्राहिम की दी गई क़ुर्बानी को याद करने के लिए बकरा ईद को मनाया जाता हैं। बताया जाता है कि हज़रत इब्राहिम जब अल्लाह ताला की शरण में थे तो उनकी भक्ति को देखकर है हज़रत इब्राहिम की दुआ को अल्लाह ने क़बूल किया था। उसके बाद अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी और क़ीमती चीज़ की क़ुर्बानी माँगी थी।

बकरा ईद के दिन बकरा क्यों काटते हैं

बताया जाता है कि हज़रत इब्राहिम ने अल्लाह ताला की बात मानकर अपनी सबसे प्यारी चीज यानी अपने लाड़ले बेटे की क़ुर्बानी देने का निर्णय लिया था, और हज़रत इब्राहिम के लाड़ले बेटे का नाम था इस्माइल की क़ुरबानी देने के लिए ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गए। जब हज़रत इब्राहिम अपने बेटे की बलि देने के लिए जा रहे थे तो सारे हथियार तैयार करने के बाद जब बेटे की बलि देने की बारी आई तो अल्लाह ने इस्माइल की जगह एक बकरे को खड़ा कर दिया और हजरत इब्राहिम इस परीक्षा में पास हो गए उस दिन से ही बकरा ईद के दिन बकरे की क़ुर्बानी दी जाती है।

बकरा ईद कैसे मनाई जाती है

बकरा ईद के दिन सभी मुसलमान भाई सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर है नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद में जाते हैं, उसके बाद मस्जिद में जो मौलाना अजान लगाते हैं वो घर घर जाकर है घर में पल रहे बकरों की क़ुर्बानी करते हैं। सबसे पहले उस बकरे के मीट को हज़रत इब्राहिम के नाम पर किसी ग़रीब को खिलाया जाता है उसके बाद अपने चाचा ताऊ आदी परिवार के सभी सदस्य एकजुट होकर बकरे के मीट को बनाकर खाते हैं। और उसके बाद कोई ग़रीब मुसलमानों के घर है तो उनके घर में जाकर बकरे का मीट देखकर आते हैं।

ताकि उनके परिवार में भी बकरा ईद का त्योहार अच्छे से मनाया जा सके। और जैसे अपने परिवार के लोग होते हैं उनके घरों में भी मेट दिया जाता है और उनके घर से वापस भी लिया जाता है। इस तरीक़े से रेगुलर तीन दिन तक यह बकरा ईद का त्योहार मनाया जाता है।

बकरा ईद का त्योहार क्या है
  • बकरा ईद ( हज़रत इब्राहिम ) द्वारा बेटे इस्लाम की क़ुर्बानी को लेकर मन बनाया था उस समय को याद दिलाता हैं।
  • हज़रत इब्राहिम की वजह से इंसान की जगह बकरे की क़ुर्बानी दी जाती हैं।
  • अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम के बेटे की क़ुर्बानी माँगी।
  • और हज़रत इब्राहिम ने इस बात को ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार किया था।
  • अल्लाह हज़रत इब्राहिम की परीक्षा ले रहे थे

बकरा ईद बिना बकरे की क़ुर्बानी के क्यों नहीं मनाते

बकरा ईद बिना बकरे की क़ुर्बानी दिए भी मना सकते हैं और हमारे भारत देश के अंदर है बहुत सारे मुसलमान भाई ऐसे हैं जो बकरा पालन नहीं सकते या फिर बकरा ख़रीद नहीं सकते तो क्या वह लोग बकरा ईद नहीं मनाते हैं। क्यों नहीं मनाते हैं आज के समय में 20 पर्सेंट घरों में बकरे की क़ुर्बानी दी जाती है बकरा ईद के दिन में 80 पर्सेंट घरो में नमाज़ पढ़कर और बकरा ईद को मनाया जाता है।

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