सोनप्रयाग से गौरीकुंड सफ़र
सोनप्रयाग से गौरीकुंड की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है सोनप्रयाग में पहला चेक पोस्ट लगा हुआ है जहाँ पर आधार कार्ड देकर अपनी एंट्री करवानी पड़ती है। साल 2024 का तो ये हालात है कि चेक पोस्ट पर ही अपनी बारी आते आते घंटों बीते जा रहें है
क्योंकि भीड़ बहुत ज़्यादा है इसका कारण दोस्तो नवंबर से लेकर अप्रैल तक बहुत ज़्यादा बर्फ़बारी होती है इसी वजह से मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। भाई दूज के दिन श्री केदारनाथ बाबा कि आख़िरी बार आरती होती है उसके बाद अगले छह महीने तक मंदिर बंद रहता है,
अब हम बात करते हैं कि मंदिर के कपाट भाई दूज के दिन ही क्यों बंद करते हैं इसके पीछे द्वापर युग से छिपी हुई कहानी है।बताया जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव द्रोपदी के साथ हिमालय दर्शन के लिए गए थे उस टाइम केदारनाथ में भगवान शिव के मंदिर का निर्माण करवाया था और भाई दूज के दिन अपने पितरों को तर्पण किया था।
उस टाइम उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी और दूसरी मान्यता यह भी है कि भाई दूज दीपावली का अंतिम पर्व है और इसके बाद ठण्ड बढ़ जाती है इस वजह से हिमालय पर रहना संभव नहीं होता इसलिए श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट भाई दूज के दिन बंद कर दिए जाते हैं,
सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम की यात्रा
केदारनाथ जाने का सही समय क्या है वैसे तो मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो जाती है लेकिन हम बात करते हैं सही समय की मेरे हिसाब से जून जुलाई में दर्शन करना बेहद आसान हो जाता हैं
क्योंकि छह महीने मंदिर खुला रहता है और ये समय लगभग बीच का समय होता है इस टाइम जल्दबाज़ी करने वाले श्रद्धालु दर्शन करके आ जाते हैं,
सोनप्रयाग से गौरीकुंड गौरीकुंड से केदारनाथ भगवान शिव के मंदिर के बीच जो श्रद्धालुओं की भीड़ होती है वह बहुत कम हो जाती है क्योंकि जब मंदिर खुलता है और जब मंदिर बंद होने का समय आता है ज़्यादातर भक्तजन उस टाइम दर्शन करना बेहद पसंद करते हैं,
आजकल ज़्यादातर लोग फ़ोटो खींचने और वीडियो बनाने जाते हैं वैसे तो लोग सोशल मीडिया के ज़माने में Travelling को फ़ैशन मानते हैं
Kedarnath Dham Journey Details
केदारनाथ जाने के लिए सबसे पहले आपको हरिद्वार जाना पड़ेगा गंगा मैया के दर्शन करके आप केदारनाथ के लिए रवाना हो सकते हो
उसके लिए आपको प्राइवेट टैक्सी सरकारी बसें प्राइवेट बसें मिल जाएगी सरकारी बस की बात करें तो किराया लगभग हरिद्वार से केदारनाथ का 600-700 रुपये है इन दोनों के बीच की जो दूरी वो है 240 किलोमीटर समय लगेगा आपको लगभग 2 दिन 10 घंटे
केदारनाथ में भीड़ उमड़ने का कारण
देखो भीड़ होने का कारण यह है सूत्रों की मानें तो छह महीने बाद मंदिर के कपाट खुले हैं और हर व्यक्ति यही चाहता है कि मैं जाकर सबसे पहले श्री केदारनाथ जी महाराज के दर्शन करूँ और वहाँ पर जाकर फ़ोटो क्लिक करू और सोशल मीडिया पर अपलोड करूँ ज़्यादातर दोस्तों यही चलता आ रहा है आज कल दर्शन करने लोगबाग कम जाते हैं और दिखावा करने ज़्यादा जाते हैं
सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच में आज के टाइम में लाखों लोग फँसे हुए हैं और पैदल ही वो अपना सफ़र तय कर रहे हैं बताया जा रहा है कि टैक्सी जाने के लिए भी जगह नहीं है सड़क की बात करें तो सड़क इतनी संकड़ी बनायी गई है कि वहाँ से 2 गाड़ियों का गुज़रना भी बहुत मुश्किल हो रहा है
और हेलिकॉप्टर की बुकिंग हो नहीं रही है हेलीकॉप्टर की बुकिंग पहले करवानी पड़ती है यदि आप बुकिंग करवाना चाहते हो तो नीचे दिये गये इस लिंक पर क्लिक करके अपनी एडवांस बुकिंग करवा सकते हो।Click here
केदारनाथ में रुकने की व्यवस्था
देखो दोस्तों गौरीकुंड में आपको अच्छी अच्छी लग्ज़री होटले मिल जाएगी ट्रैकिंग स्टार्ट करोगे केदारनाथ मंदिर के लिए तो बीच रास्ते में आपको चाय की दुकान छोटी मोटी होटले खाने की व्यवस्था आराम करने की व्यवस्था सब चीज़ें मिलती रहेगी
मंदिर तक पहुँचते पहुँचते इन सबकी रेट थोड़ी हाई होती जाएगी बहुत सारे लोग तो अपना ख़ुद का टेंट लेके जाते हैं रूकने के लिए आराम से अपना टेंट लगा के रुक सकते हों यदि आप वहाँ पर टेंट लोगे तो आपको 300 रुपये से लेकर 3000 हज़ार रुपये पाँच हज़ार रुपये तक के लग्ज़री टेंट मिल जाएंगे और होटल की बात करें तो लगभग 1500-2000 हज़ार के अंदर आपको होटल भी मिल जाएगी
ये सब चीज़ें निर्भर करती है भीड़ के हिसाब से यदि भीड़ ज़्यादा है तो यह रेट थोड़ी ज़्यादा बढ़ जाएगी भीड़ कम है तो रेट भी कम होती जाएगी तो इसी लिए मैं आपको बता रहा हूँ की जून जुलाई अगस्त के महीने में आप जाओगे तो आपको यह सब चीज़ें सस्ती मिलेगी दर्शन भी आप आराम से कर पाओगे
केदारनाथ धाम में कौन-कौन से भगवान है
केदारनाथ की बर्फ़ीली पहाड़ी पर बना केदारनाथ धाम मंदिर जिसमें शंकर भगवान विराजमान है जिनको हम भगवान शिव शंकर भोलेनाथ महाकाल के नाम से जानते हैं और जो 2013 में बाढ़ आयी उसके बाद में मंदिर की रक्षा करने के लिए एक भीम शिला आयी थी उसकी भी वहाँ पर पूजा की जाती है बताते हैं कि इस मंदिर से क़रीबन 400 मीटर दूरी पर भेरूनाथ जी का मंदिर है वो हमेशा केदारनाथ धाम की रक्षा करते हैं।
आप जब भी केदारनाथ धाम जाएं तो भेरूनाथ मंदिर में ज़रूर जाकर आना और मेरा मानना ये है कि कम से कम आप वहाँ पर 2-4 दिन ज़रूर रोकना और प्रकृति का आनंद उठाना वहाँ पर जाने के बाद आप हर एक टेंशन भूल जाओगे और आप आनंद ही आनंद महसूस करोगे क्योंकि चारों तरफ़ वहाँ पर बर्फ़ीली पहाड़ी ही नज़र आएगी आपको।
केदारनाथ पैदल मार्ग
पैदल जाने के लिए आपको गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक का सफ़र है 16 किलोमीटर का तय करना पड़ेगा लोगों के हिसाब से तो ये दूरी 24 किलोमीटर है
लेकिन जो बोर्ड आपको दिखेगा वह 16 किलोमीटर का दिखेगा तो इस दौरान आपको जाने के लिए घोड़े की सुविधा और जो व्यक्ति कंधे पर बिठाकर ले जाते हैं वह सुविधा भी उपलब्ध मिलेगी लेकिन मेरा मानना ये हैं दोस्तों की किसी जानवर पर बैठकर जाना उचित नहीं हैं
क्योंकि जो रास्ता बना हुआ है वह है पहाड़ी के पत्थरों से बनवाया हुआ और जगह जगह पर है झरने बहते रहते हैं उनकी वजह से रास्ता पूरा गिला रहता है तो वो जानवर है बार बार गिरते रहते हैं यदि आपको बाबा ने बुलाया है तो आप पैदल चलकर ही जाना ज़्यादा समय नहीं लगेगा लगभग 10 घंटे में आराम से पहुँच जाओगे वो भी बीच बीच में रूकते हुए।
जय श्री बाबा केदारनाथ
